किशोरावस्था में बालिकाओं का शारीरिक परिवर्तन शंकाएं एवं समाधान इस विषय पर डॉ मंजू राठी द्वारा लिखी गई पुस्तक का निशुल्क वितरण किया गया।
माहेश्वरी महिला मंडल किशनगढ़ और नेशनल करप्शन कंट्रोल एवं ह्यूमन वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष में
"जागरूक बेटी एवं किशोरावस्था में होने वाले बदलाव और बेसिक लाइफ सपोर्ट -सीपीआर ट्रेंनिंग "कार्यशाला राजकीय संस्कृत विद्यालय शिवाजी नगर किशनगढ़ में आयोजित की गई।
जिसमें नेशनल करप्शन कंट्रोल एवं ह्यूमन वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन मेडिकल सेल राजस्थान की अध्यक्षा डॉक्टर मंजू राठी द्वारा किशोरावस्था में आने वाले बदलाव और बच्चों के स्वास्थ्य पर विस्तृत चर्चा की गई ,जिसमें शारीरिक मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर जोर दिया गया।
साथ-साथ सही खानपान, जीवन शैली में बदलाव, रोज क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इनके बारे में जानकारी दी गई।
जागरूक बेटी
लड़कियां खास होती है। वे लड़कों से काफी अलग होती है और बढ़ती उम्र के साथ उनके शरीर में आने वाले बदलाव भी लड़कों से अलग होते हैं ।
किशोरावस्था ,गर्भावस्था, मातृत्व और रजोनिवृत्ति जैसे प्रमुख जीवन परिवर्तन लड़कियों और महिलाओं के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तनाव पैदा कर सकते हैं। ऐसे में लड़कियों और महिलाओं को इन सभी पहलुओं से जागृत कराना हमारा फर्ज बनता है और इसी कड़ी में जनता को जागृत करने के सरकार के प्रयोजन के साथ-साथ यह पुस्तक
" चुप्पी तोड़ो- खुल कर बोलो" लिखी गई है।
डॉ मंजू राठी ने पूरा प्रयास किया है कि इस पुस्तक से महिलाओं और लड़कियों को उनके जीवन काल में आने वाले बदलाव की पहचान भलीभांति हो और उन बदलावों को अपनी जीवनचर्या में किस तरह से समायोजित करना है
इसकी विशेष जानकारी इस पुस्तक में दी गई है।
मासिक धर्म बालिकाओं के लिए कोई अनोखी घटना नहीं है यह शरीर में आने वाला प्राकृतिक बदलाव है जो अनेक वर्जनाओं और मिथकों से घिरा हुआ है। इसी वजह से लड़कियों और महिलाओं को कई जगह पर असमानताओं का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से लड़कियों और महिलाओं के सामाजिक - सांस्कृतिक जीवन के कई पहलुओं पर असर पड़ता है।
उम्र के साथ-साथ लड़कियों में आने वाले बदलाव के बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाली पुस्तक जो डॉक्टर मंजू राठी द्वारा लिखी गई है-
" चुप्पी तोड़ो- खुलकर बोलो" जिसमें लड़कियों और महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव के बारे में खुलकर चर्चा की गई है। आज भी मासिक धर्म के संबंध में युवा लड़कियों के समक्ष अनेक चुनौतियाँ है।
और इसीलिए ,
" चुप्पी तोड़ो - खुलकर बोलो " यह पुस्तक सिर्फ एक पुस्तक नहीं है बल्कि जीवन में आने वाले बदलावों की एक खुली किताब है ।
सीपीआर ट्रेंनिंग कार्यशाला
सीपीआर यह बेसिक लाइक सपोर्ट तकनीक में आता है और सीपीआर हर इंसान को आना जरूरी है। बाहरी देशों में सीपीआर की ट्रेनिंग स्कूलों से ही दी जाती है ,लेकिन अपने यहां पर अभी भी इसकी कमी है ।और इसी की वजह से आपातकालीन स्थिति में जान बचाने में आम इंसान मदद नहीं कर पाता और जब तक डॉक्टर के पास पहुंचते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है।
डॉक्टर मंजू राठी ने पूरे भारत में हर इंसान को सीपीआर सीखाने का बीड़ा उठाया है । और वह एक लाख से ज्यादा लोगों को सीपीआर की ट्रेनिंग दे चुकी है।
सीपीआर तकनीक का उपयोग कैसे और किन हालातों में करना चाहिए इसकी जानकारी हमारे देश में भी सभी को होना जरूरी है। सीपीआर देने के लिए डॉक्टर की जरूरत नहीं है इसे हम खुद दे सकते है। हां, इसके लिए आपको सही तकनीक पता होना जरूरी है । आए दिन होने वाले अनेक एक्सीडेंट , बिजली का करंट, आग से दम घुटना , माइनिंग के वक्त दम घुटने से, पानी में डूबने की वजह से , हार्ट अटैक, जहरीला पदार्थ का सेवन करने की वजह से कई लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं । अगर सही समय पर सीपीआर दिया जाए तो कई लोगों की जान बच सकती है।और यह तकनीक हर एक को आना चाहिए। इसी उद्देश्य से,
डॉ मंजू राठी, डायरेक्टर राठी हॉस्पिटल किशनगढ़ ने यह बीड़ा बहुत पहले ही उठाया हुआ है ।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे जो कि देश का भविष्य है उन्हें खासतौर पर ट्रेनिंग दी जाए और आम जनता को इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया जाए ।
डॉ मंजू राठी बड़े ही सरल भाषा में सीपीआर ट्रेंनिंग देती है और साथ में डमी पर हैंड्स ओन ट्रेनिंग भी दी जाती है।
डमी पर और लाइव डेमोंसट्रेशन के साथ सीपीआर कैसे दिया जाता है, किन परिस्थितियों में दिया जाता है और गोल्डन पीरियड में इस तकनीक का लाभ कितना महत्वपूर्ण है इसकी महत्वपूर्ण जानकारी बच्चों और जनता को दी जाती है। विद्यार्थियों को हैंड ऑन ट्रेनिंग भी दी जाती है ताकि वह अपनी गलतियों को यहीं पर सुधार सके।
सीपीआर एक ऐसी तकनीक है जिससे अगर वक्त पर यह तकनीक का उपयोग किया जाता है तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। और इसी सिलसिले में डॉ मंजू राठी जो काफी समय से निरंतर देश की जनता को और स्टूडेंट को सीपीआर की ट्रेनिंग देने के लिए जगह-जगह कार्यशाला का आयोजन कर रही है और लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास कर रही है। बच्चे इस देश के फ्यूचर है और बच्चों को यह तकनीक आना बहुत जरूरी है यह उनकी सोच है।
*DRS-ABC के माध्यम से समझाई जाती है इमरजेंसी में इंसान की जान बचाने की तकनीक* D- for Danger,R- for Response,S- for Send Request,A- for Airway ,
B- for Breathing ,C-for Circulation or CPR।
इस अवसर पर माहेश्वरी महिला मंडल किशनगढ़ की सदस्याएं उपस्थिति रही और विद्यार्थियों ने भी हैंड्स ऑन ट्रेनिंग ली और साथ में अपने हेल्थ के बारे में भी विचार और शंकाएं साझा की और उनका डॉक्टर मंजू राठी ने समाधान किया।
इस अवसर पर स्कूल के अध्यापक और अध्यापिकाओं ने भी सवाल पूछे जिनका समाधान डॉ मंजू राठी द्वारा किया गया।
"चुप्पी तोड़ो- खुल कर बोलो" यह पुस्तक सभी बालिकाओं को वितरित की गई और उन्हें अपने घर में ,आस पड़ोस में और बाकी सभी को भी यह पुस्तक पढ़ने को दी जाए ऐसी अपील की गई जिससे सभी को इसका लाभ मिले।
माहेश्वरी महिला मंडल और शाला प्रशासन ने सभी का आभार व्यक्त किया।


